विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान कहते हैं, "ममता ने अब सरकारी परियोजनाओं और कमीशनखोरी पर निगाह रखने के लिए मानीटरिंग सेल का गठन तो कर दिया है. लेकिन पहले ली गई कटमनी के मामलों की भी जांच की जानी
चाहिए."
विपक्षी दलों का आरोप है कि निचले स्तर के नेताओं ने 25 फीसदी कमीशन लिया है जबकि बड़े नेताओं ने 75 फीसदी. ऐसे में सिर्फ 25 फीसदी रकम वापस देने से ही काम नहीं चलेगा. पूरी रकम वापस करनी होगी.
सदन में विपक्षी सदस्यों ने अपने गले में जो तख्तियां लटका रखी थीं उन पर लिखा था—कटमनी का संक्षिप्त रूप सीएम है.
उनमें से एक तख्ती पर ममता को निशाना बनाते हुए लिखा गया था कि पेंटिंग की बिक्री से मिली 1.86 करोड़ रुपए का कटमनी कौन लौटाएगा? विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर श्वेतपत्र जारी करने की भी मांग की है.
ममता की टिप्पणी पर विवाद बढ़ते देख कर टीएमसी को इस मुद्दे पर सफाई तक देनी पड़ी है.
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन पर भी हाल में एक प्रमोटर से कटमनी लेने का आरोप लगा था.
लेकिन सेन ने इस आरोप को निराधार और राजनीतिक मकसद से प्रेरित करार दिया है. वैसे, ममता की टिप्पणी से पार्टी के कुछ नेताओं में भी भारी नाराजगी है.
नदिया जिले के एक टीएमसी नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि दीदी ने हमें तो गिरफ्तारी की चेतावनी दी है. लेकिन बड़े नेताओं का क्या होगा. क्या वे पैसा वापस करेंगे?
तृणमूल सांसद शताब्दी राय का कहना है कि कमीशन का यह सिलसिला काफी दूर तक जाता है.
वह कहती हैं, "सरकारी परियोजनाओं में से कटमनी या कमीशन लेने वाला व्यक्ति तो महज एक मोहरा होता है. उसके पीछे कई लोग होते हैं. ममता को काफी पहले ही इस आदत पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए थी."
राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ पंडित कहते हैं, "कटमनी पर टिप्पणी कर ममता ने भले ही अपना घर साफ करने की कवायद शुरू की हो, इससे टीएमसी के खिलाफ विपक्ष को एक मजबूत हथियार मिल गया है."
विपक्षी दलों का आरोप है कि निचले स्तर के नेताओं ने 25 फीसदी कमीशन लिया है जबकि बड़े नेताओं ने 75 फीसदी. ऐसे में सिर्फ 25 फीसदी रकम वापस देने से ही काम नहीं चलेगा. पूरी रकम वापस करनी होगी.
सदन में विपक्षी सदस्यों ने अपने गले में जो तख्तियां लटका रखी थीं उन पर लिखा था—कटमनी का संक्षिप्त रूप सीएम है.
उनमें से एक तख्ती पर ममता को निशाना बनाते हुए लिखा गया था कि पेंटिंग की बिक्री से मिली 1.86 करोड़ रुपए का कटमनी कौन लौटाएगा? विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर श्वेतपत्र जारी करने की भी मांग की है.
ममता की टिप्पणी पर विवाद बढ़ते देख कर टीएमसी को इस मुद्दे पर सफाई तक देनी पड़ी है.
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन पर भी हाल में एक प्रमोटर से कटमनी लेने का आरोप लगा था.
लेकिन सेन ने इस आरोप को निराधार और राजनीतिक मकसद से प्रेरित करार दिया है. वैसे, ममता की टिप्पणी से पार्टी के कुछ नेताओं में भी भारी नाराजगी है.
नदिया जिले के एक टीएमसी नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि दीदी ने हमें तो गिरफ्तारी की चेतावनी दी है. लेकिन बड़े नेताओं का क्या होगा. क्या वे पैसा वापस करेंगे?
तृणमूल सांसद शताब्दी राय का कहना है कि कमीशन का यह सिलसिला काफी दूर तक जाता है.
वह कहती हैं, "सरकारी परियोजनाओं में से कटमनी या कमीशन लेने वाला व्यक्ति तो महज एक मोहरा होता है. उसके पीछे कई लोग होते हैं. ममता को काफी पहले ही इस आदत पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए थी."
राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ पंडित कहते हैं, "कटमनी पर टिप्पणी कर ममता ने भले ही अपना घर साफ करने की कवायद शुरू की हो, इससे टीएमसी के खिलाफ विपक्ष को एक मजबूत हथियार मिल गया है."
No comments:
Post a Comment